
अपने भगत से कितना,
माँ प्यार करती है,
रहती है झुँझन में,
पर ध्यान रखती है,
तर्ज – हनुमान की पूजा से।
जब भी पुकारूँ मैं,
माँ दौड़ कर आए,
चांदी का सिंहासन,
माँ छोड़कर आए,
अपने भगत पर कितना,
उपकार करती है,
करती है रखवाली,
दिन रात भक्तों की,
सुनती हमेशा वो,
हर बात भक्तों की,
मजधार हो नैया,
माँ पार करती है,
हम मांगते रहते,
वो भेजती रहती,
भक्तों की हालत को,
वो देखती रहती,
भक्तों की खाली झोली,
हर बार भरती है,
कर्जा तुम्हारा माँ,
कैसे उतारेंगे,
‘बनवारी’ सेवा में,
जीवन गुजारेंगे,
गर्दन झुकी है मेरी,
आँखें बरसती है,
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