
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये
Apane Shyaam Kanhaiya Ko Dekhuun Bina Palak Jhapakaaye lyrics
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये,
इन अँखियों की डिब्बियां के ढक्कण टूट टूट गिर जाये,
वो शरीर ही किस काम का जो नाम ना ले श्याम का,
बार बार ढक्कण गिरते हैं कान्हा,
परेशान दिल को करते हैं कान्हा,
डर लगता है पलक झपकते श्याम चला ना जाये,
रक्खो ये नैणा तब तक मिलाये,
बांकी छवि ना इनमें जब तक समाये,
सुणा है इन नैनों के ज़रिये दिल से दिल टकराये,
खुले रहते हैं हरदम ढक्कण तुम्हारे,
अगर एक छण भी गिरते ढक्कण हमारे,
चाहे अखियाँ फुट जाये पर पर ऐसा दिन ना दिखाये,
बनवारी नैणा मिलाते मिलाते अँखियों में सूरत समाते समाते,
बनवारी जो कभी गिरे ना वो ढक्कण लग जाये,
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