
अब जाऊं कहाँ मैं सांवरिया,
दोहा – मोहन नैना आपके,
नौका के आधार,
जो जन इनमे बस गए,
सो जन है गए पार।
आ पिया इन नैनन में,
मैं पलक ढाप तोहे लूँ,
ना मैं देखूं गैर को,
ना तोहे देखन दूँ।
तुझे देख के दिल भरता ही नहीं,
पिया छोड़ गए दिल तोड़ गए,
अब बनके फिरूं मैं बावरिया,
देखे – मैं फिरू श्याम तेरे नाम की जोगन।
तिरछी चितवन बांकी है अदा,
तेरे नैन कटीले कजरारे,
अब तेरे बिना जी लगता नहीं,
अब काहे सताए सांवरिया,
तेरी मुरली की मीठी तानों पर,
दिल मेरा कन्हैया खोने लगा,
अब आके सुना दो बांसुरिया,
अब मिल भी जाओ सांवरिया,
सावन की मस्त बहारों में,
दिल रो रो कर मेरा तड़प गया,
मेरे नैना ऐसे बरस रहे,
जैसे सावन की हो बादरिया,
स्वर – श्री धन्वंतरीदास जी महाराज।
श्री धाम वृंदावन।
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