
काच्छबो ने काच्छबी रेता रे जल में,
लेता हरी रो नाम,
भगती रे कारण बाहर आया,
किना संतो ने प्रणाम,
संतो रे चरने पडीया जी,
झटके झोली में धरीया जी,
कलप मती काच्छब कूडी ओ,
सावरिया बिना रूडी ओ,
भगती रे भेद निपायो जी,
सावरो नेचे आयो राम।।
अरे संत ले हांडी मे धरीया,
तले रे लगाई आग,
पकड संतो हांडी रे माई धरीया,
केवे काच्छबी सुन रे काच्छबा,
थारो हरी बताव कठे,
थारो सालखतानी रे मौत री,
आयी निशानी रे,
सावरिया री रीता रूडी राम।।
ऊबी बलू मै आडी बलू रे,
मिल गई झालो झाल,
अरे आडी बलू मै ऊबी बलू रे,
अजेनी सांवरो आवियो रे,
मारो प्राण निकल्यो जाय,
कठे रे थारो मोहन प्यारो रे,
मीठोडी मुरली वालो रे,
बलती वेतो बैठो पीठ पर,
राखु थारो साथ,
निन्दरा मत कर मारे नाथ री,
निन्दिरा मत कर मारे नाथ री,
राखु थारो प्राण,
हरी मारो आसी वारू रे,
जीवो ने तारन सारू रे,
काची नींद में सुतो रे सांवरो,
मोडी सुनी रे पुकार,
काची नींद में सुतो सांवरो,
बलती अगन मे तारीया जी,
बलती अगन मे तार दिया जी,
काच्छब ने किरतार,
वाणी वो भोजोजी गावे रे,
टिकमदा राय बतावे रे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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