
बन जाय ताडका मारी खरदूखण फ़ौज संघारी
सब विघ्न दिये तुम टारी जी मुनि यज्ञ कराने वाले ॥
तुम जनकपुरी पग धारा शिवधनुष तोडकर डारा
राजों का गर्व निवारजी सीता को बिहाने वाले ॥
दशरथ आज्ञा सिर धारी जी बनवास सिधाने वाले
तुम चित्रकूट चल आये सब ऋषि मुनि सुख उपजाये
जहां भरत मिलाप कराये जी निज कंठ लगाने वाले ॥
तुम पंचवटी में आई निज पर्ण कुटी बनवाई
तहां सीता गई चुराई जी मृगमार गिराने वाले ॥
सुग्रीव मित्र बनाया बाली को मार गिराया
हनुमान दूत भिजवाया जी लंकाजलवाने वाले ॥
तुम सागर पुल बनवाई सब सेना पार लंघाई
रावण से करी लडाई जी सब वंश मिटाने वाले ॥
घर जनकसुता को लाये दे राज्य विभीषण आये
ब्रम्हानंद बिमल यश गायेजी सुरकाज बनाने वाले ॥
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