
बाबा खेउँ गूगलियो धूप कँवर सा अजमल रा
बाबा खेउँ गूगलियो धूप,
कँवर सा अजमल रा,
आरतियों री बेला,
बेगा आवजो हे हा।।
पहला पोरे री बात,
माता रे मैणादे उतारे आरती हे हा।।
बीजे पोरे री बात,
बेन रे सुगणा उतारे आरती हे हा।।
होय घोड़े असवार,
आरतियों री बेला बेगा आवजो हे हा।।
तीजे पोरे री बात,
राणी आ नेतल उतारे आरती हे हा।।
चौथे पोरे री बात,
बाई रे डाली उतारे आरती हे हा।।
बोलियां रावळ जी रा नार,
गावे रूपादे नार,
म्हाने जुग जुग चरणों में,
राख कँवर सा अजमल रा,
कँवर सा अजमल जी रा,
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार।
आकाशवाणी सिंगर।
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