
अलख री दुहाई रामदेवजी समाधी भजन,
हलचल बात हुई हलकारे ओ जी,
चलचल बात हुई रे सारे देव,
स्वर्गा माई सोलमा गावे ओ जी,
रामा कंवर ने लिना रे बधाय,
अलख री दुहाई,
मै तो झूठ नी बोलू ओ जी,
रामदेवजी मिलीया म्हाने,
भुजा रे पसार,
अलख री दुहाईं मै तो,
झूठ नी बोलू ओ जी।।
अरे चलती बात वेकटी आयी ओ जी,
हडबूजी बैठा सोच विचार,
पूंगा नेरव नेजो पुगो ओ जी,
स्वर्गा मे सतीया लिया रे बधाय,
पवन परवो पंथ किनो न्यारो ओजी,
डावा जिमना लिया रे बुलाय,
जल रो घडो ओर सुहागन नारी ओ जी,
डावी भुजा सु जिमनी तो पाय,
मुख में चून लियो मालाणी ओजी,
तरवर बोले घेर गंभीर,
हडबूजी तो ऊबा सुगन विचारे ओजी,
बल मे मिले अबलीया पीर,
लीलो लीलो घोडो आप निरंजन जी,
लालो लुम्बो तपे रे ललाड,
मेहा री जाल पास आय मिलीया जी,
भायो री हुई वटे डोडी मनवार,
मिलीया पीर जुगा रा भाई ओ जी,
रंगडे री जाजम दीनी ढाल,
मोती चूर मिठाईयाँ भेंटे ओ जी,
अमलो री हुई वटे डोडी मनवार,
सेनो हंदी बात आयी रे म्हारे काने ओजी,
मासु बात सुनी न जाय,
जीवत पडा सवाई अजमाल रा ओ जी,
हाची रे कुड भाई म्हाने रे बताय,
केई नर साचा केई नर कूडा ओ जी,
मन रे मते वो चाले संसार,
केवे रामदेव सुन सिद्ध हडबू ओ जी,
चलती बात कियो विस्तार,
अरे थे हडबू रूनीचे जावो ओ जी,
मै जावा घोडला री लार,
मन रे मते चरे म्हारा रेवत जी,
सगला री लेवा थोडी सार सम्भाल,
रतन कटोरो माता मैणादे ने दीजो जी,
अमलो रो पोथो अजमलजी रे हाथ,
बेल गेडियो विरमदेव ने दीजो जी,
बाकी तंवरो ने म्हारा घणा रे जुहार,
दोनो पीर सह घोडे चढिया ओ जी,
निवन करे राणो ने राव,
ए बघेवरो आयो भूतेडो ओ जी,
पीरजी तो पुग्या देव द्वार,
हडबूजी चाल रूनीचे आया ओ जी,
गुमनो बैठो तंवरो रो परिवार,
सभा देखेने बोलीयो ओ साखलो जी,
केनो करो भाया विचार,
नम राखनी तंवर नेमीया ओ जी,
दशम रा लिया उपदेश,
दिना ग्यारस तिलक संपोडो ओ जी,
गुफा मे बैठा लियो परदो आप,
लीलो लीलो घोडो आप निरंजन ओ जी,
कह भाई हडबू म्हाने मिलीया ओ जी,
घेरन गया घुडलो रे लार,
रतन कटोरो माता मैणादे ने दीनो जी,
बेल गेडियो विरमदेव ने दीनो ओ जी,
बाकी भायो ने दिया जाढा रे जुहार,
अरे हमचे हुआ तंवर सब भेला ओ जी,
जा खोदी पीरो री परसार,
कुंकुम केवडो मायने महके ओ जी,
माय मिली फूलो री फूलमाल,
खोदी समाधि जो नही पायो ओ जी,
भायो कोनी किनो रे विचार,
पीढी पीढी़ पीर रूनीचा मे होवता ओ जी,
अब होय जो पंडित साम्भजो सेवा,
बिछडतो री भायो वेगत नही जानी ओ जी,
विलुम्बीयो नही बागा री साल,
बूटी बूंद सायर मे रलगी ओ जी,
कठोडे खोजु अमे रामा रे कंवार,
अरे गूगल धूप खेवु धणीया ने ओ जी,
राखजो धणीया माना री लाज,
हरि चरने भाटी हरजी बोले ओ जी,
मेल दीजो म्हाने भवसु पार,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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