
अवध बिहारी हो हम आए शरण तिहारी
अवध बिहारी हो,
हम आए शरण तिहारी,
गिरवर धारी हो,
महापातकी रहा अजामिल,
उसे मिला सुरधाम,
नारायण आ गए लिया जब,
पुत्र का अपने नाम,
संकट हारी हो,
आया शरण तिहारी,
जब जल में गजराज ग्राह में,
युद्ध हुआ घनघोर,
हार गया गज तो बोला,
दौड़ो नंद किशोर,
सुदर्शन धारी हो,
हिरणाकुश प्रहलाद को जब,
बाँधा खंबे के साथ,
तब बोला प्रहलाद कहाँ हो,
आओ दीनानाथ,
शरण हितकारी हो,
स्वर – राजन जी महाराज।
प्रेषक – सचिन कौशल।
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