
सजा दो घर को गुलशन सा
अवध में राम आये हैं...-2
अवध में राम आये हैं
मेरे सरकार आये हैं
लगे कुटिया भी दुल्हन सी
पखारो इनके चरणों को
बहा कर प्रेम की गंगा
बहा कर प्रेम की गंगा -3
बिछा दो अपनी पलकों को
तेरी आहट से हैं वाकिफ़
नहीं चेहरे की है दरकार -2
बिना देखे ही कह देंगे
लो आ गए हैं मेरे सरकार
दुआओं का हुआ है असर
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