
अवल वाणी अवल खाणी,
अवल रा उपकार है हा,
साची केता झूठी माने,
बड़ा ही बेकार है,
ओगणगारा गणा दिठा,
मुख मिठा अन्तर झूठा,
वचनो रा हिणा रे हा,
साधु भाई वे सैण हमारा रे हा।।
लेवता गुण ले नी जाणे,
अजोणो रा यार है हा,
गाफलो सुं हेत केसो,
कांई इयारो एतबार है,
आक ने अमृत सिंचयो,
सिंचयो निराधार है हा,
नीम रे नारेल केसा,
ऐसी नुगरा कार है,
चक्कर मे एक पत्थर मेलियो,
पत्थर रो परिवार है हा,
पैला मीठा पचे खारा,
अंत खारो खार है,
उठो चैला शब्द झेलो,
खेड़ खांडे धार है हा,
बाबो डूंगरपुरी बोले,
प्रेल तणो आधार है,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – पुखराज जी पटेल बांटा
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