
पारसीगुट्टा रे माय कोई,
हैदराबाद रे माय,
आईजी री ज्योता जागे जी,
कोई पारसीगुट्टा रे माय।।
पारसीगुट्टा में आईजी बिराजे,
सगला रा सारे काज,
आईंजी री ज्योता जागे जी,
बडेर लागे अति सोवनी,
ध्वजा उडे असमान,
चौथा रामजी करे सेवना,
इन बडेर मे आय,
सांझ सवेरे होवे आरती,
भगत करे जयकार,
भूरा रामजी जसारामजी,
संग मे कालूजी काग,
आईजी रा कीर्तन गावे जी,
कोई इन पारसीगुट्टा रे आय,
कोई इन पारसीगुट्टा रे माय।।
पारस रामजी जसारामजी,
जसराज जगदीश प्रसाद जी,
हुक्मारामजी साथ,
हुक्मारामजी रामलालजी,
मांगीलाल जी काग,
आईजी रा हरजश गावे जी,
आईजी रा हरिगुन गावे जी,
लेखक – लखन चौधरी।
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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