
आओ रे गणराज गौरी के लाल,
हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,
सुनता ना कोई और दुखियों का हाल,
तूने भवसागर से नैया को निकाला,
जो भी तेरे शरण आया उसको संभाला,
सिद्धिविनायक तू सिद्ध काज करता,
तू संकटमोचन है संकटो का हर्ता,
सबको संभाला जैसे हमे भी संभाल,
रिद्धि सिद्धि वाला तू चार भुजाधारी,
आ भी जाओ करके अब मूष पे सवारी,
तुझे ऋषि मुनियो ने दिन रैन पूजा,
तुझसा अभय दानी सृष्टि में ना दूजा,
तूने किये पूरे है सबके सवाल,
जो भी तेरे भक्ति में खुद को है डुबोता,
उसका कभी भूल के अमंगल ना होता,
हम भी निर्दोष तेरे छोटे से पुजारी,
कभी सुध ले लो हे गणेश्वर हमारी,
थोड़ा बहुत कर ले तू हमारा खयाल,
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