
आजा मेरे कन्हैया बिन मांझी के सहारे
आजा मेरे कन्हैया,
बिन मांझी के सहारे,
डूबेगी मेरी नैया,
बीच भँवर में है नैया,
बन जाओ श्याम खिवैया,
तर्ज – ओ नन्हे से फ़रिश्ते।
बैठे है आप ऐसे,
सुनता नहीं हो जैसे,
नैया हमारी मोहन,
उतरेगी पार कैसे,
तुझे क्या पता नहीं है,
मझधार में पड़ी है।
मेहनत से हमने अपनी,
नैया थी एक बनाई
लेकिन भँवर में मोहन,
कोशिश ना काम आयी,
हारे है हम तो जब भी,
तूफानों से लड़े है।
पतवार खेते खेते,
आखिर मैं थक गया हूँ
शायद तू आता होगा,
कुछ देर रुक गया हूँ,
‘बनवारी’ बेबसी में,
चुपचाप हम खड़े हैं।
इन्सान क्या है मोहन,
बेबसी का एक खिलौना,
होता वही है हरदम,
लिखा है जो भी होना,
किस्मत के हाथ शायद,
भगवान से बड़े है।
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