
आठ ही के काठ के कोठरिया हो दीनानाथ ,
रूपे छा ने लागल केवाड़
ताहि ऊपर चढ़ी सुतले हो दीनानाथ
बांझी केवडूवा धइले ठाड़
चदर उघारी जब देखले हो दीनानाथ ,
कौन संकट पडल तोहार
पुत्र संकट पडल मोरा हो दीनानाथ
ओहिला केवडूवा धईले ठाड़।
नैना संकट पड़ल मोरा हो दीनानाथ
ओहिला केवडुआ धईले ठाड़
काया संकट पडल मोरा हो दीनानाथ ,
बांझीनी के पुत्र जब दिहले दीनानाथ
खेलत-कुदत घर जात
अन्हरा के आंख दिहले कोढ़िया के कायावा
हसत बोलत घर जात
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
