
आन बान मर्यादा राखन जीवन बनगो जंग रे
आन बान मर्यादा राखन,
जीवन बनगो जंग रे,
सांगा के सौ घाव शरीरा,
आभूषण ज्यु अंग रे,
हाथ कट्यो कद पाव कट्यो कद,
आँख काट दी संग रे,
पाछा पाव धरीया नी सांगा,
भिड्या बण भुजंग रे,
धिन धिन है थाने धणीया,
बिण बिण थे भाला अणीया,
पृथ्वी पर राखीयो पिछान रे,
जय महावीर मेवाड़ धरा महाराणा।।
दोहा – सांगा के संग समर में,
लडीया वीर अपार,
सूरज डूबीयो सुहाग को,
भयो पन्ना जग अन्धीयार।
पन्ना सुन पागल जिया,
पडी रे खाय पछाड,
स्वामी स्वर्ग सिधावीया,
मरीया हित मेवाड।
पंच तत्व रो पुतलों,
आयो देश रे काम,
चन्दन उदय हिये चिपके,
पन्ना लियो रे कालजे थाम।
कदे बयाणा खानवा मे,
झूंझे अट्ठाईस जंग,
मर मिटीया मेवाड़ हित,
थाने रंग रंग सांगा रंग।
सांगा स्वर्ग सिधावीया,
राणा रतन रो राज,
राजगदी री राड मे,
होवन लाग्या अकाम।
रतन सिंह बूंदी गया,
ने खेलन शूरा शिकार,
हाडा सूरज रतन रे,
छावे मना विकार।
मल्लयुद्ध के मायने,
दोनो आवे काम,
बूंदी ओर मेवाड़ मे,
भई अन्धेरी शाम।
भूप विक्रमदत भयो,
महामूर्ख महाराण,
दुखी भया मेवाड़ जन,
मिटीयो राज सम्मान।
बहादुरशाह फिर से कियो,
गढ चितौड़ पे वार,
अणचितिया युद्ध मायने,
मचीयो हा हाकार।
हे रहतो निशदिन घात लगाय,
बहादुरशाह बेरी बहादुरशाह बेरी,
हे सांगा बिन सूनो मेवाड़,
चितौड़ ने घेरी,
ए लडे बहादुरशाह सू जंग,
कर्मवती रानी हाडी महारानी,
हे सज धज मर्दानो वेश बढे क्षत्राणी,
सज धज मर्दानो वेश बढे क्षत्राणी।।
हे भिडिया एक एक वीर मेवाड़,
कट्या तिल तिल कट्या तिल तिल रे,
हे हाडी संग जौहार मे,
कुदगी रानीया मिलने,
हे मन में बहादुरशाह पछताया,
जौहर देख जलतो जौहर देख जलतो,
हुई जीत के भी आज हार,
गयो हाथ मलतो,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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