
आ आ आ रे …
आयो कहाँ से घनश्याम॥
रैना बिताई किस धाम ॥
हाय राम
आयो कहाँ से …
हाँ रात की जागी रे ॥
अँखियाँ हैं तोरी
रात की जागी रे अँखियाँ हैं तोरी
हो रही गली गली जिया की चोरी ॥
हो नहीं जाना बदनाम हाय राम
सज धज तुमरी का कहूँ रसिया
धनिध ध
मधप गपम रेमग
मगस निस निस निसगमग
सगम पनिगम
पनिस गमगसा निनिप मगस प
ऐसे लगे तेरे हाथों में बँसिया ॥
जैसे कटारी लियो थाम हाय राम ॥
हाँ मैं ना कहूँ कछु मोसे ना रूठो॥
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूँछो ॥
बीती कहाँ पे कल शाम
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