
आयो लाभ जनम शुभ पायो,
दोहा – प्रीत काहू से न कीजिये,
देह धर कहे जगदीश,
जे कीजिये प्रेम तो,
दिजे तन मन धन और शीश।
पायो मोनखो हरी ने क्यों नी ध्यायो,
ओपणे में लिखो अगली प्रीतों पालो,
आया सो घर फेर सम्भालो,
आपणा में लिखो आगलोणि प्रीतों पालो।।
लोहा काठ जगत जम जालो,
मोह रे भरम रो बंधियो हिमालो,
कंचन घड़ाए कुड़ परो निवारो,
हरी ऱी दरगाह में हेत सुं पधारो,
चरण गुरों रे कवल चित लावो,
बोलिया प्राग स्वामी निकलंग ने ध्यावो,
आयो लाभ जन्म शुभ पायो,
गायक – महावीर चवदसिया।
प्रेषक – दिनेश पांचाल बुड़ीवाड़ा।
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