
आयो सावणियो,
दादी जी म्हारी,
हिंडो हिन्डै आज,
बेला गुलाब चंपा माही,
खूब सज्यो सिणगार,
ओ आयो सावणियों,
झीणो झीणो चमकै मुखड़ो,
भक्तां रो मन हरखै जी,
मिल भगतां के सागै दादी,
करां सिंधारा आज,
माथे पे बिंदिया हाथ में कंगना,
चुनड़ी चमचम चमके है,
केडसती म्हारी बनड़ी बणी है,
कर सोलह सिणगार,
पांव में पायल कान में झुमका,
नाक की नथली प्यारी है,
लाल सुरंगी मेहंदी हाथा,
नयना कजरै की धार,
रिमझिम रिमझिम बरखा बरखै,
सावणियो आयो प्यारो जी,
अंतर केसर की खुशबू से,
मैहक रह्यो दरबार,
ठुमक ठुमक कर थिरक थिरक कर,
म्हें तो मंगल गावां जी,
बिन घुंघरू के म्हें तो नाचां,
नाचां नव नव ताल,
घूम घूम कर घूमर घाल्यां,
ढोल बजावां कोई थाल,
झूम झूम कर ‘मधु’ तो नाचे,
माँ ने रिझावै आज,
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