
इक बार मैया मोरे अंगना में आना,
आकर मैया मोहे दरस दिखाना,
एक बार मैया मोरे अंगना में आना,
तर्ज – परदेसियों से ना अँखिया।
मैं निर्धन तेरी पूजा ना जानू,
जग जननी माँ तुझको कैसे रिझाऊ,
आज पड़ेगा तुमको रिश्ता निभाना,
काहे की मैया तेरी ज्योत जलाऊ,
तेल दिया ना बाती समझ ना पाउँ,
अंतर्मन में मेरे दीप जलाना,
कुछ भी नहीं है पास में मेरे,
चंद लकीरे है हाथो में मेरे,
इन हाथो में तेरा नाम लिख जाना,
तू महलो में रहने वाली,
लेकिन यहाँ है माँ झोपड़ी खाली,
कबतक पड़ेगा मुझको आंसू बहाना,
स्वर – मुकेश बागड़ा जी।
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