
इन अंखियो का सवरा नजारा
नजरे यो श्याम से मिली
ये याहा सारा लगता हमारा
जग की ठोकर दर दर खाई
भटक भटक कर शरण में आई
अब चाहिए न जग का सहारा
अधियारे में कर दिया उजाला
शीश का दानी खाटू वाला
मेरी किस्मत का चमका सितारा
मन दीवले की श्याम ही बाती
श्याम ही गोलू सचा साथी
बिन श्याम के न कुछ भी गवारा
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