
एक बार आईजो म्हारे पावणा,
केसरिया कंवरा,
आकेली रा धणीया,
देवरिया रा धणीया,
घणी ओ करूँ मनवार,
घणी ओ करूँ मनवार हो ओ।।
अरे गाँव रे आकेली मे बनीयो,
देवरो केसरिया कंवरा,
गाँव रे आकेली मे बनीयो,
भगत जोवे थारी बाट,
भगत जोवे थारी बाट हो ओ।।
आवोनी पधारो म्हारे आंगने,
ध्वजा ओ फरूके असमान,
ध्वजा ओ फरूके असमान हो ओ।।
पैदल पैदल आवे जातरी,
दूर देशारा आवे जातरी,
मेलो रे भरे भरपूर,
मेलो रे भरे भरपूर हो ओ।।
गाय तो दुवावु रजरी,
गोरची केसरिया कंवरा,
दूधा सु धोवावु थारा पाँव,
दूधा सु धोवावु थारा पाँव हो ओ।।
गाँव रे आकेली मे बनीयो देवरो,
गाँव देवरिया माय देवरो,
भैस दुवावु रजरी गोरची,
गूगरी रंदावु थारे खीर,
गुगरी रंदावु थारे खीर हो ओ।।
लाडू चूरमा ले आयो ओ,
लाडू ने चूरमा ले आयो ओ,
रूच रूच भोग लगावु,
कंवर जी म्हारा,
रूच रूच भोग लगावु हो ओ।।
साउण्ड चौधरी बाजे आपरे,
झुझण्डा से डी जे धूम मचाय,
झुझण्डा रो डी जे धूम मचाय हो ओ।।
“सीरवी मनीष” थारी महिमा,
लिखे ओ कंवरा,
‘रावत चौधरी’ करे अरदास,
रावत चौधरी करे अरदास हो ओ।।
गायक – रावत चौधरी।
लेखक / प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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