
ऐंवे रूसिया ना कर मेरी जान सजना
ऐंवे रूसिया ना कर मेरी जान सजना,
इक दिन छड्ड जाणा ए जहांन सजणा,
कोई अपणा होवें ते दुःख सुख वंडदा,
किसी गैर ते की करिये एतबार सजणा ।।
तुम जान अयोग्य बिसारों मुझे,
पर मैं तुम्हें ना बिसराया करूँ,
मेरी इसमें ख़ुशी तुम रूठा करो,
मैं अकेले में तुमको मनाया करूँ,
मेरे रोने पर जो तुमको आये हँसी,
तेरे चरणों की धूलि को चन्दन समझ,
मैं तो माथे पे अपने सजाया करूँ ।।
इक दूजे दा कद्दी ना दिल तोड़िये, ना तोड़िये,
मुख सजणा तों कद्दी ना मोड़िये, ना मोड़िये ।।
बैके वेखि ईश्क दी वेडी अस्सा पार लंगणा,
अल्लाह बादशाह है साड्डा निगेहबान सजणा,
हुई तेरे वाज्जो दुनिया वीरानसजणाँ,
अग्ग अपने इश्क वाली सेकिए, आजा सेकिये,
पीछा मुड़ के ना किसे वेळे वेखीये,
मुख दिसणा नईयो दिन चढ्दा,
तेरे दम नाळ जान विच जान सजना,
कख रह कर ना कर परेशान सजना,
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