
ओढ़ चुनर मैं तो गई रे सतसंग में,
साँवरियो भिगोई म्हने,
गहरा गहरा रंग में,
ओढ़ चुनड़ मैं तो गई रे सतसंग में।।
सत री संगत में गुरु जी विराजे,
कर कर दर्शन होई रे मगन मैं,
सत री संगत में सहेलिया विराजे,
गाई गाई हरी गुण होई रे मगन मैं,
सत री संगत में ज्योति जगत है,
सत री संगत में साज बजत है,
बाई मीरा गावे प्रभु गिरधर नागर,
भवजल पार करोनी पल छीन में,
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