
ओ लीलण म्हारी जइजे जइजे गढ़ खरनाले शहर
ओ लीलण म्हारी,
जइजे जइजे गढ़ खरनाले शहर,
कोई गढ़ खरनाले शहर,
भाभल ने निभण देवजे,
ओ तेजाजी कैया जावा,
खाली म्हारी पीठ,
कोई सुनी म्हारी पीठ,
मावड़ली देसी ओलबा,
कइजे कइजे साचोड़ा समचार,
तू तो साचोड़ा समचार,
नजरा सु देखी केवजो,
ओ तेजाजी एड़ा काई,
लिख्या विधाता लेख,
म्हारा लिख्या विधाता लेख,
तेजल सु छेती मैं तो पड़ा,
राखो राखो मनडा माही धीर,
कोई हिवड़ा माही धीर,
स्वर्गा में मिलसी जिवडा,
ओ तेजाजी था बिन म्हारे,
जीवन को नही सार,
म्हारे जीवन को नही सार,
लीलण भी संग में चालसी,
ओ प्यारी लीलण,
मैं थारो चंदो तू म्हारी है चकोर,
म्हारे कालजिया री कोर,
मानु मैं थाने जीव री जड़ी,
मत ना तू तो आसुडा ढलकाय,
मत आसुडा ढलकाय,
तेजल रो काँपे जीवड़ो,
ओ तेजाजी कइयाँ रोकूँ,
नैणा माइलो नीर,
म्हारो नैणा माइलो नीर,
म्हारो भर भर आवे हिवड़ो,
स्वर – छोटूसिंह जी रावणा।
प्रेषक – गोपाल सुथार जसोल।
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