
कदम पे झूला झूले कन्हाई
सावन की रुत मन भायी,
कदम पे झूला झूले कन्हाई,
झूले कन्हाई,
झूला झूले कन्हाई,
काली बदरिया है छाई,
कदम्ब पे झूला झूले कन्हाई।।
तर्ज – सावन की सबको बधाई।
मुख मुस्कान मोहनी प्यारी,
बांकी नयन पे जग बलिहारी,
चंदन का पाटा रेशम की डोरी,
जा पे श्याम की छवि अति भोरी,
सखिया लख मुस्काई;
नाचे मोर कोयलिया गाए,
पपीहा पीहू की रटन लगाए,
फूलों की महक लुटाई,
देव लोक से देवता आए,
झूला देख सभी हर्षाए,
कजरी शुभम रूपम ने गाई,
गायक – शुभम रूपम जी।
प्रेषक – साहिल सांखला।
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