
अब तो लेलो रे अवतार
कबसे धरा सिसकती कान्हा तुझको रही पुकार,
अब तो लेलो रे अवतार अब तो लेलो रे अवतार,
आकर बोझ उतारो मेरा ओ मेरे आधार,
पाप बढ़ा है धर्म घटा है, घटती जाए उमरियां,
दीन दुखी लाचार की अब, ना लेता कोई खबरिया,
सभी व्यवस्थित करो प्रभु, अब वृकिट बहुत संसार,
सभी जगह घुस गई मिलावट रिश्तों में आहट है,
धूमिल हुए है रिश्ते सारे, आई कड़वाहट है,
सभी मिलावट में डूबे, तेरे दूध दही आहार,
पहले भी रक्षा करते हो, झोली भरते आये,
जब जब कोई तुम्हे पुकारे, नंगे पाँव पठाये,
मेरी प्रार्थना भी करुणा कर, सुनलो कृष्ण मुरार,
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