
कन्हैया धरती पे आया,
चौपाई – जब जब होई धरम के हानी,
बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी।
तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा,
हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा।
पापियों को धरा से मिटाने,
पाठ गीता का सबको पढ़ाने,
धरती पे आया मेरा श्याम,
धरती पे आया घनश्याम,
कानुड़ा धरती पे आया।
देवकी माँ ने मथुरा में जाया,
माँ यशोदा ने गोकुल में पाला,
बोझ भक्तों का स्वयं ही उठाने,
ज्ञान गीता का सबको सुनाने,
रात भादो की अष्टमी सुहानी,
अरे झूम के बोला यमुना का पानी,
झूम के बोला यमुना का पानी,
जिसकी आशा में बीते जमाने,
छोड़ कैलाश भोले है आए,
‘लख्खा’ गोकुल में दर्शन है पाए,
भोले गोकुल में दर्शन है पाए,
‘बेधड़क’ मीठी मुरली बजाने,
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