
करण जैसा भाई मारा ना जाता,
दोहा – किसी ने कहा था,
किसी से ना कहना,
लगे चोट दिल पर तो,
खामोश रहना,
बना लो कोई,
खूबसूरत बहाना,
दर्द दिखाओगे तो,
हंसेगा जमाना,
मेरे आंसुओं,
सीख लो मुस्कुराना।
करण को बुरा बताते है,
यह तो किस्मत का हेटा था,
तुम दुश्मन जिसको कहते हो,
वह करण तो मेरा बेटा था।
वो ऐसा गम का प्याला था,
जिसे जिव्या पीने नहीं देती,
जल में इसे बहाती ना,
तो ये दुनिया जीने नहीं देती।
अरी राज माता ना हमसे छुपाती,
भाई से टूट भाई चारा ना जाता,
हमें क्या पता था संग घात होगी,
इतनी बड़ी हमसे छुपी बात होगी,
यही सोचती तू दिन रात होगी,
तेरे दिल में ना जाने मैया क्या बात होगी,
नैनो से वो नैनो का तारा ना जाता,
कवच और कुंडल जिसने कर दाने दीने ,
दान में ही तुझको उसने पांच बाण दिए,
नाता निभाता कौन जो उसने निभाया,
दान में ही उसने तुझको पांच बाण दीजे,
बिगड़ा जन्म दोबारा सुधारा न जाता,
झुकी है निगाहें सोचा झुक ना सकेगी,
अहसानो की कीमत चूक ना सकेगी,
औरत जात को मैं यही श्राप देता हूँ,
पेट में कोई बात रुक ना सकेगी,
खिलता चमन फिर उजड़ा ना जाता,
अरी राजमाता ना हमसे छुपाती,
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