
करो ना सुनवाई है दिल से दुहाई
करो ना सुनवाई,
है दिल से दुहाई,
सुनलो बाबा श्याम,
तेरी आली सरकार,
खाली जोगी ने है,
श्याम सेवा चाहि,
तर्ज – वफ़ा ना रास आई।
माना की कमी है मुझमे सुनो,
मुझे फिर भी तुम अपना लेना,
खारे सागर सा नीर हूँ मैं,
मुझे मीठी झिर बना देना,
अब करूँ क्या बता,
जो तू ले अपना,
तेरी ज्योत है मन में जगाई,
कोई पूछे तेरे तख्ते में है क्या,
तेरी मूरत श्याम दिखाता हूँ,
कोई पूछे हसरत क्या है तेरी,
मैं श्याम की खिदमत चाहता हूँ,
कैसे जियूं उस बिन,
गिन गिन रात दिन,
नहीं सही जाए ये जुदाई,
दिन रात मैं चाहूँ दिल से सुनूं,
सत्संग कीर्तन में रमा रहूं,
ना कुछ भी चिंता रहे मुझे,
लखदातारी में पड़ा रहूं,
‘सोनी’ तेरा ध्यान,
धरे सुबह और शाम,
बस है यही आस लगाई,
स्वर – मनीष तिवारी।
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