
जिस माटी में जन्म लिया,
उस माटी में मिल जाएगा,
कर ले प्राणी राम भजन,
नहीं अंत समय पछताएगा।।
देखें – ओ पापी मन करले भजन।
जोड़ जोड़ कर रखा कमाया,
साथ नहीं कोई ले जा पाया,
क्या तेरा क्या मेरा प्यारे,
छूट यही सब जाएगा,
करलें प्राणी राम भजन,
नींद निरंतर मोह की सोया,
धन यौवन और बचपन खोया,
बीत रही है तेरी जवानी,
और समझ कब आएगा,
मैं मेरा और तेरा करता,
नित्य पाप की गठरी भरता,
जन ‘अंकुश’ कर राम भजन,
नहीं राम तजे सुख पाएगा,
स्वर – श्री अंकुश जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
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