
कानूड़ा लाल घड़लो महारो भरदे रे
कानूड़ा लाल घडलो म्हारो,
कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे ,
भर दे, ऊंचा दे, सर पर धर दे रे ,
तू मत जाणी कान्हा, आई मैं अकेली,
सात सहेलियां म्हारे संग छे रे ,
तू मत जाणी कान्हा, दूर गाँव की ,
बरसाने म्हारो घर छे रे ,
तू मत जाणी कान्हा, अकन कंवारी ,
श्री कृष्ण म्हारो वर छे रे ,
चन्द्रसखी ब्रजपाल कृष्ण छवि,
हरि के चरणों मे महारो चित स रे,
संपादक:-विजय डिडवानिया
सरदारशहर
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