
कालो की काल महाकाली
भवानी माई कलकत्ता वाली
कलकत्ता वाली भवानी माई काली
महिमा तुम्हारी निराली
हे अंगारों जैसे नयन लाल लाल
अधरों की लाली गले मुंड माल
जा लम्बी जीभ न काली
आगे है हनुमत जी झंडा संभाले
पीछे कुबेर संग भैरव मतवाले
अरे बिच में विकराल रूप वाली
दानव दलन करे दुष्टों को मारे
काली की शक्ति जगत जन के तारे
अरे हाथो में भारी भुजाली
काली की शक्ति को जिसने भी जाना
मौनी दीवाना हुआ उसका जमाना
दुष्टों से जगत करो खाली
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