
किशोरी जी तुम्हारा मुस्काना याद आए,
बरसाना याद आए रे बरसाना याद आए,
रह रह के किरपा बरसाना याद आए,
मेरे खयालों में मंदिर तुम्हारा है,
सोने का सिंहासन और श्रृंगार प्यारा है,
अँखियों में बरस रही प्रेम की वो धारा है,
प्रेम की वो धारा है, प्रेम की वो धारा है,
प्रेम की उस धारा में नहाना याद आए,
आपकी नजर श्यामा जिधर जिधर जाती है,
रस की बौछारें भी उधर बरस जाती है,
करुणा से दासों की आँखे भर आती है,
आँखे भर आती है, आँखे भर आती है,
बिन मांगे सबकुछ लुटाना याद आए,
परिकर्मा पथ प्यारा प्यारे ब्रजवासी है,
चारो ओर खुशियां है ना कोई उदासी है,
स्वामिनी श्री राधा जी सारे दास दासी है,
सारे दास दासी है, सारे दास दासी है,
मांग मांग टूक उनसे खाना याद आए,
गेहवरबन मंदिर में संतो का संग है,
जिनके रोम रोम भरा राधा राधा रंग है,
हरिदासी गाए बाजे ढोल मृदंग है,
बाजे ढोल मृदंग है, बाजे ढोल मृदंग है,
मीठा हसना हसाना याद आए,
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