
क्यों छुप के बैठते हो परदे की क्या जरुरत
क्यों छुप के बैठते हो,
परदे की क्या जरुरत,
भक्तों को यूँ सताने की,
अच्छी नहीं है आदत,
तर्ज – दुनिया ने दिल दुखाया।
माना की मुरली वाले,
बांकी तेरी अदा है,
तेरी सांवरी छवि पे,
सारा ये जग फ़िदा है,
लेकिन हो कारे कारे,
ये भी तो है हकीकत,
टेढ़ी तेरी छवि है,
तिरछी है तेरी आँखे,
टेढ़ा मुकुट है सर पे,
टेढ़ी है तेरी बातें,
करते हो तुम क्यों सांवरे,
भक्तो से ये शरारत,
हमको बुला के मोहन,
क्यों पर्दा कर लिया है,
हम गैर तो नहीं है,
हमने भी दिल दिया है,
देखूं मिला के नज़रे,
दे दो जरा इजाजत,
दिलदार तेरी यारी,
हमको जहाँ से प्यारी,
तेरी सांवरी सलोनी,
सूरत पे ‘रोमी’ वारि,
पर्दा जरा हटा दो,
कर दो प्रभु इनायत,
स्वर / रचना – रोमी जी।
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