
।। श्लोक ।।
गजाननं भूतगणादि सेवितं,
कपित्थजम्बूफलसार भक्षितम्,
उमासुतं शोकविनाशकारणं,
नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम्।।
नमस्कार करते है चरणों में हम,
गजानंद स्वामी कर दो करम,
गजानन्द स्वामी कर दो करम।।
तीनो लोको की किनी परिक्रमा,
पार ना पाए तुमसे विष्णु और ब्रम्हा,
रिद्धि और सिद्धि के तुम हो परम,
माता गौरा की आँख के तारे,
मैया गौरा की आँख के तारे,
दर्शन करके प्राणन प्यारे,
तुम्हरे चरणों में सदा रहे हम,
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