
बरसानें में बगला देखा
तरज़-: नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे
बरसानें में बंगला देखा,
बंगला राधे रानी का
कितना पावन प्रेम बरसता,
ठाकुर और ठाकुरानी का
उड़न खटोले बरसानें के,
बैठ बधाई गाई हो बैठ बधाई
गाई हो
रह रह के वो छवि निहारी,
नैंनो बीच समाई जो नैंनो बीच
समाई जो
धन्य हुआ है जीवन सारा,
क्या रुतबा महारानी का
आंखें चार हुई तो टप टप,
असुंवन धारा बह निकली असुंवन
धारा बह निकली
प्रेम भाव का उठा है हिलोरा,रूठी
किस्मत भी बदली
छूकर जैसे मुझको निकला,
आंचल राधे रानी का
जन्म जन्म लहरी कृपा ही,
कुंज किशोरी पाऊं मैं
बिछा रहूं इंन पद कमलों में,
चरणामृत रज़ पाऊं मै
तन मन हारा हाल कहूं क्या,
हौश़ कहां गुण ज्ञानीं सा
रचनां एवम् स्वर-: लहरी जी
बाबा धसका पागल पानीपत
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