
दुख मिट जाते है दर जब तेरे आते है,
सब का मंगल हो जो दर्शन तेरे पाते है,
भाग्ये विद्यते तू ही गणेशा तू ही मंगल कारी,
लंगड़े को पाँव मिल जाए जब होती किरपा तुम्हारा
गजानना श्री गणराया आधी बंदु तुझ मोरेया,
भीड़ है भारी दर पे भिखारी मांग रहा तुझे खुशियां,
दर्श दिखा किरपा करदे देखि है तेरी दुनिया,
तेरी शरण में आये है श्रदा के दीप जलाये है,
खुशियों का जो डोर गया वो लौट कभी न आया है,
दर दर भगतका याहा वहां मुझको सब ने ठुकराया है,
तू ही पार लगा नैया अटकी भव सागर में नैया,
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