
गणनाथ से हटकर मन कही जाता नही है,
सच पूछो तो उन जैसा कोई दाता नही है,
है सुख कही अगर समझ लो यही है,
भक्तों की आशाओं को जो पूरी करते,
रिद्धि सिद्धि से वरदायक झोली भरते,
रौशनी से भर दिये आँखों के दिये,
ना उम्मीदें जीने की थी वो भी है जिये,
अनहोनी को होनी करते देवा यहाँ,
इनके दर पे आके झुकता सारा जहां,
झुकता सारा जहां,
इनके चरणो में दिल घबराता नही है,
आते है सवाली कई सवाल लिये,
संग कई उलझनो के जाल लिये,
अंतर्यामी ने सबको जवाब दिये,
आये जो भी लौटे नये ख्वाब लिये,
अपनी करली का कर ले इकरार जहाँ,
इस मंदिर जैसा मिलता दरबार कहाँ,
दरबार कहाँ,
दिल खोलने में कोई शर्माता नही है,
जहाँ गणराया हो वहाँ विघ्न आता नही है,
उन बिन कोई दुखहर्ता कहलाता नही है,
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