
गणपति गजवदन विनायक,
थाने प्रथम मनावा जी,
आना कानी मत ना करीयो,
थारी किरपा चावा जी,
तर्ज – फूल तुम्हे भेजा है खत में
माथे मुकुट निरालो थाने,
पार्वती का लाल कहावो,
गणपति दुंद दुन्दाला है,
रिद्धि सिद्धि थारे संग में सोहे,
मूसे की असवारी है।
रतन भवर गढ़ आप विराजो,
दुखियो का दुःख दूर करो,
जो भी थारे मन में ध्यावे,
उसकी इक्छा पूर्ण करो,
म्हारी लाज भी राखो गणपति,
थाने मनसु ध्यावा जी।
शुभ और लाभ के देने वाले,
सबकी नैया खेते हो,
मित्रमंडल थारी शरण में आयो,
क्यों ना दर्शन देते हो,
थाने खुश करने की खातिर,
‘राजू’ भजन सुणावे जी।
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