
गणपति गौरी के लाला मैं पूजा करूं तुम्हारी,
हे देवाधिदेव वंदना पहले करूं तुम्हारी....
सोया चंदन और केसर का मस्तक तिलक लगाऊ,
गले पुष्पों की माला डालूं ज्योत सुगंध जलाऊ,
हे गजबंदन पुकारु तुमको रख लो लाज हमारी,
रिद्धि सिद्धि बुद्धि बिधाता और विद्या के दाता,
भक्त वंदना करते तेरी शरण जो तेरी आता,
हे गजबंदन पुकारे तुमको सुन लो अरज हमारी
मोदक लड्डू खीर चूरमा तुमको भोग लगाएं,
जो भी तेरी महिमा गाए मनवांछित फल पाएं,
हे गणनायक सिद्धिविनायक सुन लो विनय हमारी,
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