
गणपत सुरसत शारद सिमरू गुरु मिल्या ब्रह्मज्ञानी
गणपत सुरसत शारद सिमरू,
दीजो अनुभव वाणी हा,
परसत परसत पीर परसीया,
परखी पीरो री निसोणी संतो,
गुरु मिल्या ब्रह्मज्ञानी,
ग्यान सुनाय कियो हरी नेड़ो,
बात अगम री जोणी रे संतो,
गुरु मिल्या ब्रह्मज्ञानी हा।।
दिल मे दरस्या प्रेम मे परस्या,
सतगुरु री सैलोणी हा,
अगम निगम रो खेल बतायो,
आ तो जुगाती ओलखाणी संतो,
अल्ला खुदा अलख निरंजन,
निराकार निर्वोणी रे हा,
हर दम हेर गेर घर लाया,
पाई संत री निसाणी,
गुरु अवधुता पूरा मिल्या,
गुरु मिल्या गम जोणी हा,
ए हेमनाथ सतगुरु रे चरणे,
सेंध सुरता समोणी,
गायक – सुरेश लोहार।
प्रेषक – पुखराज पटेल बांटा
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