
गा गा के सुनाऊं,
मस्ती में सुनाऊं,
झूम झूम के सुनाऊं सबको,
चर्चे राम नाम के,
तर्ज – अपनी प्रेम कहानियां।
ये दशरथ नंदन है,
इनका करते वंदन हैं,
ये जो दशरथ नंन्दन हैं छबीला,
नैना काले अंग सम्हाले,
तीर कमानिया,
ये तो धनुषधारी हैं,
ये जग हितकारी हैं,
ये जो धनुषरधारी हैं गठीला,
इसके आगे फीके लागे,
सबकी जवानियाँ,
सुन्दर अंग अंग है,
इनके जानकी संग हैं,
जानकी संग है इनके,
सुंदर अंग अंग हैं सुरीला,
रंग रंगीला अंग गठीला,
इनकी निशानिया,
इनने शवरी को तारा,
अहिल्या नारी उद्धारा,
इनने शवरी को तारा उद्धारा,
‘राजेन्द्र’ इनकी सारे जग पे,
बड़ी मेहरवनिया,
गीतकार / गायक – राजेन्द्र प्रसाद सोनी।
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