
गुरुवर के चरणों में,
मेरा है प्रणाम,
आठों याम जपूँ मैं,
गुरूजी को नाम,
ये भी देखें – चरणों में गुरुवर के।
मैं हूँ दीन तो सतगुरु दयालु,
किरपा है करते बनके कृपालु,
गुरुवर की सेवा ही,
सबसे है ऊँचा काम,
सतगुरु में देखूं मथुरा और काशी,
आत्मा मेरी है सतगुरु की दासी,
गुरु में ही देखे है,
मैंने शिव और राम,
नैनो में बसे गुरु जय हो जय हो,
दिल कहूं गुरु जय हो जय हो,
गुरु के बिना नहीं,
जग में कही आराम,
कमल कपिल पूरी संत सयाने,
भक्तों के रहते है बनके मुहाने,
स्वर – साध्वी पूर्णिमा दीदी।
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