
मत कर भोली आत्मा
आ नुगरा रो संग रे ।
नुगरों री संगत में,
ओ मिनख जमायो खोयो रे ॥
सुओ – सुओ जाणती मैं,
पिंजरियो बणवायो रे ।
करमोंरे परताप सूं ओ,
कागो निकल आयो रे ॥
हीरा – हीरा जाणती मैं,
अंगूठी घड़वाई रे ।
पथर निक
आयो रे ॥
सोनो – सोनो जाणती मैं,
तीमणियो घड़वायो रे ।
पीतल निकल आयो रे ॥
साधु – साधु जाणती मैं,
आँगणिये जीमायो रे ।
ढोंगी निकल आयो रे ॥
गावे राणी रूपांदे जी,
उगमसिंह जी री चेली रे ।
सतगुरु रे परताप सूं आ,
अमरापुर में खेली रे ॥
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