
गुरूजी मने रंग लो न रंग में हरियाणवी भजन
गुरूजी मने रंग लो न रंग में,
दुःख चिंता में काया पड़ी,
घणा होरया सूं तंग मैं।।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हीं गुरूजी,
तुम्हीं शिव भण्डारी हो,
ज्ञान की जोत जगा दो गुरुजी,
चिंता मिटाओ सारी हो,
तेरी शरण में आनंद गुरुजी,
दया करो एक बारी हो,
सच्चे साधु आला गुरु जी,
चाहूं सूं ढंग मैं,
गुरू जी मन्ने रंग लो न रंग में।।
तेरे चरणों में रहूं गुरु जी,
सच्ची भगती करणी है,
तेरे चरणों की धुल गुरु जी,
मैंने झोली में भरणी है,
तेरे सहारे मैंने गुरु जी,
मोह से मुक्ति करणी है,
बाहर काढ़ दे मैंने गुरु जी,
फसया दुनिया जंग मैं,
दे दो भीख मने गुरु जी,
राम नाम के मोती हो,
किस्मत मेरी जगा दो गुरु जी,
जो पढ़ क न सोती हो,
पाप कर्म और मतलब मैं,
मैंने सारी जिंदगी खो दी हो,
हाथ जोड़ मैं करू सु विनती,
आया सत्संग मैं,
सतगुरु मेरे मोहनपूरी जी,
सारा खोट माफ करो,
सेवक रविन्द्र भट्टि प,
अपना गुरु जी हाथ धरो,
इस बालक नादान की गेल्यां,
जीवन भर का साथ करो,
ऐसी दया दिखा दो गुरु जी,
बसों मेरे कण कण मैं,
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