
घनन घननन घंटा बाजे चामुण्डा के द्वार पर
घनन घननन घंटा बाजे,
चामुण्डा के द्वार पर,
रूके यहाँ पर कालरात्रि,
चंडमुंड को मार कर,
निर्मल जल की धारा में,
पहले जाकर स्नान करो,
ज्योति जलाकर मन मन्दिर में,
अम्बे माँ का ध्यान धरो,
वरदानी से मांगो वर तुम,
दोनों हाथ पसार कर,
ब्रम्हा वेद सुनाते इनको,
विष्णु शंख बजाते हैं,
ब्रह्म वेद सुनाते इनको,
शंकर डमरू बजा बजाकर,
माँ की महिमा गाते है,
जय माता दी गूंज रहा है,
नारद वीणा तान मे,
शक्तिपीठ यह हिमाचल का,
देव भूमि भी प्यारी है,
रूके रूप जहाँ चामुण्डा माँ,
खप्पर संग कठारी है,
दुष्टों की ली बली यह पर,
भागे पापी हार कर,
भागे पापी हारकर,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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