
घर से परसों की कहन गए श्याम
घर से परसों की कहन गए श्याम ना आए बरसों बीत गए.....
बरसों की तो कह गए मोहन किंतु बिता दिए बरसो,
कब आवेगी बैरन परसों अखियन लागी तरसो,
अंखिया लरसों निस दिन भर से आठो याम,
ना आए बरसों बीत गए....
ऋतु कंत आवे बसंत खेतन मैं फूली सरसों,
मिलन हेतु मे मुरलीधर सों घर ही घर में तरसों,
राधा वर सों मेरो कह दीज्यो प्रणाम,
उजड़ी मथुरा बस गई अब तो बस्ती गई उजड़ सों,
मथुरा वाली अपनी है गई राधा है गई परसो,
मानो बृजवासी पे गयो विधाता हार,
विषधर कालिया गयो है जब ते वंचित रही ज़हर सों,
मरने लायक नहीं रह गई लटकी रह अधर सों,
तडपत रह गई गयी कलेजा हार,
आचार्य राजकृष्ण
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.




