
राम गयो वनवास,
म्हारो लखन गयो वनवास,
चंदा छुप जा रे,
चंदा छुप जा रे बादल में,
म्हारो राम गयो वनवास।।
राम बिना मारी सुनी अयोध्या,
लखन बिना ठकुराई,
सीता बिना म्हारी सुनो रसोई,
कौन करे चतुराई,
आगे आगे राम चलत है,
पीछे लक्ष्मण भाई,
बीच बीच मे चलत जानकी,
शोभा वरणी न जाई,
सावन बरस भादवो बरसे,
पवन चले पुरवाई,
वॄक्ष के निचे तीनो भीगे,
राम लखन सीता माई,
रावण मार राम घर आये,
घर घर बटत बधाई,
मात कौसल्या करत आरती,
तुलसीदास जस गाई,
स्वर- मोइनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – पुखराज पटेल (बांटा गुड़ामालानी)
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