
चलो चले हम मंदिर में किसका इंतज़ार है
चलो चले हम मंदिर में,
किसका इंतज़ार है।
श्लोक – मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।
आज मंगलवार है,
बालाजी का वार है,
मंदिर में बालाजी जी को,
हम सिन्दूर चढ़ाएंगे,
फुल चढ़ा के बाला जी को,
हम खुश करके आएंगे,
कर बालाजी से प्यार है,
करना हमें इज़हार है,
बालाजी जी तैयार है,
फिर किसकी दरकार है,
बजरंगी दुनिया में राम से,
पहले पूजे जाते है,
राम बिना मेरे बजरंगी,
कहीं भी रह ना पाते है,
इन दोनों का प्यार है,
यही राम कथा सार है,
तुझको ऐतबार है,
तो तेरी नईया पार है,
हारा हुआ महसूस तू करता,
पर बंदेया तू हारा नहीं,
साथ में बैठा जग का मालिक,
बंदेया तू बेसहारा नहीं,
‘मित्तल’ उठ तू हिम्मत कर,
दुनिया की ना परवाह कर,
बालाजी जी मेरे कर देते,
सबका बेडा पार है,
चारों युग प्रताप है जिनका,
दुनिया में उजियाला है,
साधू संत के जो रखवाले,
बाबा घोटे वाला है,
सब संतो के प्यारे है,
सीता माँ के दुलारे है,
लक्ष्मण जिनके भईआ है,
पार लगाते नईया है,
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