
चाहे जितना ले ले कान्हा
चाहे जितना ले ले कान्हा काहे को तरस ता है,
ये प्यार भगतो की कुटिया में बरस ता है,
कुटिया का हर तिनका मिलने को तरस ता है,
कुतिया के छपर से बस प्रेम टपकता है,
कुटिया में रहने वाला तेरा नाम जपता है,
ये प्यार भगतो की कुटिया.....
घर पर जो आऊ गे वापिस नही जाओ गये,
ये प्यार गरीबो का तुम भूल ना पाओ गये,
एक वार आने जाने में तेरा क्या बिगड़ता है,
भीलनी की कुटिया से वो प्यार लाये है,
लो झूठे बेरो का उपहार लाये है,
ये किसा सुने वाला तुझे अपना समजता है,
घर वापिस जाओ गे दिल छोड़ के जाओ गे,
तुम आधे रस्ते से फिर वापिस आओ गये,
बनवारी दिल तेरा मेरा एक जैसे लगता है,
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